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रविवार, १३ सप्टेंबर, २०१५

औरंगाबाद दैनिक भास्कर अपडेट...


* कई दिनों के बाद मिला दमदार संपादक, दमदार यूनिट हेड की जरुरत
* समाचार संपादक अब्दुल कदीर के पंख छांटना शुरू


पिछले दो माह पूर्व औरंगाबाद दैनिक भास्कर का संपादक पद कृष्णकान्त तिवारी ने संभाला है। उनके रूप में औरंगाबाद संस्करण को एक दमदार संपादक मिला है। दीर्घ अनुभव, दमदार कार्यप्रणाली, प्रबल नेतृत्व क्षमता, हर विषय का गहरा अध्ययन एवं तुरंत निर्णय लेने की क्षमता के चलते संपादक तिवारी के काम से मालिक एवं अधिकाधिक कर्मी खुश हैं। वहीँ चार साल से समाचार संपादक पद पर जमे बैठे अब्दुल कदीर तथा दो वर्ष से यूनिट हेड पद संभाल रहे एसके झा 'भास्कर' को डुबोने के अलावा कुछ खास कर नहीं सके। सर्कुलेशन बढ़ाने के नाम पर कई स्कीमें चलाकर भास्कर को लाखों, करोड़ों रुपए का चुना लगाया। सर्कुलेशन बढ़ने के बजाय उसमें घट हो गई।
नागपुर में बैठे मालिक ने अब समाचार संपादक अब्दुल कदीर के पंख छांटना शुरू कर दिए हैं। उनके खासमखास पोलटिकल रिपोर्टर अब्दुल बारी को उनकी करतूतों के चलते कुछ दिन पहले निकाल दिया गया है। कहा जा रहा है कि चार साल में टाइपिंग न सीखने की वजह से उन्हें हटाया गया है। किन्तु असली वजह कुछ और ही है। बारी को बचाने के लिए समाचार संपादक ने खूब प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी बीच चर्चा है कि अब्दुल बारी को हटाने के बावजूद वह आज भी दैनिक भास्कर का पत्रकार होने की बात लोगों को बताता है। इसके अलावा अब्दुल कदीर के नजदीकी लातूर, नांदेड, अहमदनगर के जिला प्रतिनिधियों को भी हटाकर अब वहां नए प्रतिनिधियों को नियुक्त किया गया है। 
अब्दुल बारी के बाद अब रिजल्ट अच्छा नहीं होने से औरंगाबाद के और दो शहर प्रतिनिधिओं का पत्ता कटने वाला है। वहीँ अब्दुल कदीर समर्थक दो महिला उपसंपादक जो कि केवल दो घण्टे ड्यूटी करती है। वह भी कतार में हैं। किन्तु महिलाएं होने से प्रबन्धन उनपर तुरन्त कार्रवाई करने से कतरा रहा है। यह महिलाएं जानबूझकर किसी पर प्रताडना, विनयभंग का मामला दर्ज करने के लिए आगे-पीछे नहीं देखती। ज्ञात हो कि एक महिला ने कुछ माह पहले चार उपसंपादकों पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया था।
इन सब बातों से जाहिर है कि समाचार संपादक अब्दुल कदीर का काउंटडाउन शुरू हो गया है। वहीं यूनिट हेड एसके झा का रिजल्ट अच्छा नहीं होने से दमदार संपादक के साथ दमदार यूनिट हेड की भी आवश्यकता है। तब जाकर औरंगाबाद भास्कर के 'अच्छे दिन आएंगे।'

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