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बुधवार, ७ जानेवारी, २०१५

मिलीभगत से भास्कर को लगाया लाखों का चूना

औरंगाबाद - समाचार संपादक (स्वयंघोषित संपादक) और एक विशेष विज्ञापन प्रतिनिधि ने औरंगाबाद भास्कर को लाखों रुपए का चूना लगाना का मामला ऑफिस में चर्चा का विषय बना हुआ है। दो वर्ष पहले भास्कर का बिजिनेस बढ़ाने के उद्देश्य से स्वयंघोषित संपादक ने उनके खासमखास दोस्त को यूनिट हेड की अनुमति से विशेष विज्ञापन प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया था। 'का-करे' संबधित प्रतिनिधि ने बोलबच्चन करते हुए यूनिट हेड का विश्वास संपादन किया। दो वर्ष तक विशेष परिशिष्ट निकालकर विज्ञापन प्रसिद्ध किए गए। वसूली भी की गई लेकिन उसने और स्वयंघोषित ने मिलीभगत कर खुद की जेब भरी। पांच लाख रुपए को चूना लगाने की चर्चा है लेकिन अंदरूनी आंकड़ा अलग होने का अंदेशा व्यक्त किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि स्वयंघोषित का दोस्त होने से यूनिट हेड ने भी वसूली के लिए उसे परेशान नहीं किया। आखिरकार विशेष विज्ञापन प्रतिनिधि चूना लगाकर चल गए और यूनिट हेड बस देखते रह गए। नागपुर प्रबंधन की अनदेखी से और यहां के सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे होने से भास्कर की नैया डूबना लाजिमी है।
'विशेष संवाददाता' खबर छपवाने मांगता है रुपए
दैनिक भास्कर औरंगाबाद में शुरू हुआ तब स्वयंघोषित संपादक ने उसके रिश्तेदार को पोलिटिकल रिपोर्टर के रूप नियुक्त किया। लेकिन ये विशेष संवाददाता पत्रकारिता छोड़ रुपए के पीछे पड़ा। उसने छोटी-मोटी खबर छपवाने के लिए राजनेता तथा अन्य लोगों से रुपए मांगकर तथा लेकर भास्कर का नाम मार्केट में ख़राब किया है। औरंगाबाद के पत्रकारों में रुपए लेने वाले इस 'भारी' संवाददाता की खासमखास चर्चा भी होती रहती है। कई राजनेता तथा लोगों ने इसकी शिकायत भास्कर कार्यालय से की लेकिन कार्यालय में तो उन्हें बचाने वाले आंका ही बैठे हुए हैं। विशेष बात यह है कि दैनिक भास्कर में चार वर्षों से राजनीतिक विज्ञापनों का सूखा है। ऐसे लोगों के चलते राजनेताओं ने मानो दैनिक भास्कर का बहिष्कार ही किया है। भास्कर में नियम है कि हर संवाददाता अपनी खबर खुद टाइप करें। लेकिन टाइपिंग न आने से इस विशेष संवाददाता के लिए एक आपरेटर रखा हुआ है। साहब चार वर्ष से टाइपिंग सीख रहे हैं, अभी तक सफलता नहीं मिली।

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